बुंदेलखंड के दूरस्थ इलाकों में रहने वाले छात्रों के लिए एक नई राहत भरी योजना शुरू हो रही है। राज्य सरकार ने फैसला किया है कि जिन छात्र-छात्राओं के घर से सरकारी माध्यमिक स्कूल 5 किलोमीटर या उससे ज्यादा दूरी पर है, उन्हें सालाना 6000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। यह राशि सीधे बैंक खाते में पहुंचेगी, जिससे आने-जाने का खर्चा कम होगा और पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित होगा।

यह योजना मुख्य रूप से कक्षा 9 से 12 तक के छात्रों के लिए है। झांसी, चित्रकूट, जालौन, हमीरपुर, महोबा, बांदा और सोनभद्र जिलों के हजारों बच्चे इसका फायदा उठाएंगे। खास बात यह है कि पीएम श्री स्कूलों में पढ़ने वाली छात्राओं को भी इसमें शामिल किया गया है। कुल 28 हजार से ज्यादा लाभार्थी चिह्नित हो चुके हैं। विभाग ने योजना को इसी सत्र से लागू करने की पूरी तैयारी कर ली है।
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आवेदन प्रक्रिया आसान और पारदर्शी
योजना का लाभ लेने के लिए छात्रों को एक साधारण फॉर्म भरना होगा। फॉर्म में यह घोषणा करनी होगी कि उनके आसपास 5 किलोमीटर में कोई सरकारी स्कूल उपलब्ध नहीं है। सत्यापन के लिए स्थानीय स्तर पर व्यवस्था है।
ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम प्रधान इसकी पुष्टि करेंगे। स्कूल में प्रधानाचार्य फॉर्म चेक करेंगे। शहरों में पार्षद जिम्मेदारी संभालेंगे। सभी सत्यापन होने के बाद पैसे डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर से खाते में आ जाएंगे। पहली किस्त सितंबर से मिलने की संभावना है। यह प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी रखी गई है, ताकि कोई भुगतान में देरी न हो।
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शर्तें सख्त, लेकिन लाभकारी
भत्ता पाने वालों को स्कूल में नियमित उपस्थिति दिखानी होगी। पिछली तुलना में कम से कम 10 प्रतिशत ज्यादा अटेंडेंस जरूरी है। अगर यह शर्त पूरी न हुई, तो अगली किस्त रुक सकती है। इसका उद्देश्य साफ है छात्रों को प्रेरित करना, ताकि वे रोज स्कूल आएं और पढ़ाई पूरी करें।
इससे न केवल आर्थिक बोझ कम होगा, बल्कि गांवों के बच्चे शहरों की तरह शिक्षा का लाभ ले सकेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी योजनाएं ड्रॉपआउट को रोकेंगी और ग्रामीण शिक्षा मजबूत करेंगी।
योजना का असर और भविष्य की उम्मीदें
यह पहल बुंदेलखंड जैसे पिछड़े क्षेत्रों के लिए वरदान साबित होगी। यहां सड़कें खराब हैं, यातायात सीमित है। बच्चे पैदल या साइकिल से घंटों सफर करते हैं। अब 6000 रुपये से वे बस या अन्य साधन इस्तेमाल कर सकेंगे। छात्राओं के लिए यह खासतौर पर उपयोगी है, क्योंकि सुरक्षा और सुविधा बढ़ेगी।
विभाग के अधिकारियों ने बताया कि योजना की निगरानी ऑनलाइन होगी। मासिक रिपोर्ट से उपस्थिति ट्रैक होगी। सफल होने पर इसे पूरे प्रदेश में फैलाया जा सकता है। अभिभावक भी उत्साहित हैं, क्योंकि इससे बच्चों की पढ़ाई में रुकावट कम होगी।
शिक्षा विभाग का यह कदम सराहनीय है। दूर के गांवों में शिक्षा पहुंचाने का सपना अब हकीकत बन रहा है। बच्चे बिना चिंता के स्कूल जा सकेंगे, और उनका भविष्य उज्ज्वल होगा। जल्द ही आवेदन शुरू होने वाले हैं, इसलिए तैयार रहें।
















