
साल 2026 भारत में संपत्ति अधिकारों और विरासत (Inheritance) के नियमों के लिए एक बड़े बदलाव का साल बनकर उभरा है, हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम और सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसलों ने अब स्थिति पूरी तरह साफ कर दी है, अगर आप अपने हक को लेकर लापरवाह हैं, तो एक छोटी सी कानूनी चूक आपकी वर्षों की जायदाद को हाथ से निकलवा सकती है।
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पैतृक संपत्ति (Ancestral Property): अब जन्म से ही बराबर का हक
- 2005 के संशोधन के बाद अब यह पूरी तरह स्थापित हो चुका है कि पैतृक संपत्ति (जो चार पीढ़ियों से चली आ रही हो) में बेटियों का भी उतना ही हक है जितना बेटों का। सुप्रीम कोर्ट के ताजा निर्देशों के अनुसार, यह हक जन्मसिद्ध है और पिता अपनी मर्जी से इसे किसी एक के नाम नहीं कर सकते।
- यदि पैतृक संपत्ति का कानूनी तौर पर विधिवत बंटवारा हो जाता है, तो मिलने वाला हिस्सा उस व्यक्ति की ‘स्व-अर्जित’ (Self-acquired) संपत्ति मानी जाएगी।
स्व-अर्जित संपत्ति: पिता की मर्जी है ‘सुप्रीम’
- पिता ने अपनी कमाई से जो मकान या जमीन खरीदी है, उस पर बच्चों का कोई कानूनी हक तब तक नहीं है जब तक पिता जीवित हैं, पिता जिसे चाहें उसे यह संपत्ति गिफ्ट (Gift) कर सकते हैं या किसी के भी नाम वसीयत (Will) कर सकते हैं।
- यदि पिता बिना वसीयत किए गुजर जाते हैं, तभी बच्चों को बराबर हिस्सा मिलेगा, लेकिन अगर वे वसीयत में किसी बच्चे को बेदखल कर देते हैं, तो उसे चुनौती देना लगभग नामुमकिन होगा।
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2026 के नए बदलाव: प्रोबेट की झंझट खत्म
- 1 जनवरी 2026 से लागू निरसन एवं संशोधन अधिनियम, 2025 के तहत अब वसीयत को अदालती प्रमाणित (Probate) कराने की अनिवार्य शर्त को खत्म कर दिया गया है।
- पहले मुंबई, चेन्नई और कोलकाता जैसे शहरों में वसीयत लागू कराने के लिए वर्षों तक कोर्ट के चक्कर काटने पड़ते थे। अब केवल वसीयत और मृत्यु प्रमाण पत्र के आधार पर संपत्तियों का हस्तांतरण सीधे बैंक या लैंड रजिस्ट्रार के पास जाकर कराया जा सकेगा।
सावधान! इन गलतियों से जा सकती है जायदाद
- 12 साल का कब्जा नियम (Adverse Possession): यदि आपकी जमीन पर किसी ने लगातार 12 वर्षों तक कब्जा कर रखा है और आपने कोई कानूनी कदम नहीं उठाया, तो वह व्यक्ति मालिकाना हक का दावा कर सकता है।
- डिजिटल रिकॉर्ड की अनदेखी: अब सरकार डिजिटल लैंड रजिस्ट्री (Land Records) को आधार से जोड़ रही है, यदि आपके दस्तावेज अपडेटेड नहीं हैं, तो धोखाधड़ी का खतरा बढ़ जाता है।
अपनी संपत्ति को सुरक्षित रखने के लिए डिजिटल इंडिया लैंड रिकॉर्ड्स मॉडर्नाइजेशन प्रोग्राम के तहत अपने दस्तावेजों को ऑनलाइन चेक करें और किसी भी विवाद की स्थिति में विशेषज्ञ वकील से परामर्श लें।
















