रेलवे ने यात्रियों के लिए नया नियम लागू कर दिया है, जिससे स्लीपर क्लास में 200 किलोमीटर से कम दूरी का सफर भी पहले से ज्यादा महंगा हो जाएगा। RAC टिकटों पर पूरी तरह पाबंदी लग गई है, अब सिर्फ पक्की बुकिंग ही चलेगी। ये बदलाव अमृत भारत एक्सप्रेस जैसी नई ट्रेनों में खासतौर पर लागू हो रहे हैं।

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स्लीपर क्लास में न्यूनतम किराया क्यों बढ़ा?
अब स्लीपर क्लास का बेसिक किराया 200 किलोमीटर की दूरी के हिसाब से तय होगा, यानी छोटे रूट्स पर भी पूरा पैसा देना पड़ेगा। पहले RAC से लोग आधा-अधूरा टिकट लेकर शेयरिंग करते थे, लेकिन अब वो सुविधा खत्म। सिर्फ कन्फर्म टिकट ही वैलिड माना जाएगा, वेटिंग वालों को चढ़ने नहीं दिया जाएगा। इससे ट्रेनों में भीड़ कम होगी और असली सीट वाले आराम से सफर करेंगे।
RAC बंद होने का पूरा खेल
RAC का मतलब था Reservation Against Cancellation, जहां दो लोग एक बर्थ शेयर करते। लेकिन रेलवे ने इसे बंद कर दिया ताकि हर पैसेंजर को पूरी जगह मिले। खासकर अमृत भारत II जैसी ट्रेनों में ये सख्ती बरती जा रही है। महिलाओं, बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए अलग कोटा खुलेगा, लेकिन जनरल में कोई शेयरिंग नहीं। छोटे स्टेशनों पर जाने वाले लोकल यात्रियों को अब एक्स्ट्रा बोझ उठाना पड़ेगा।
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नए किराए का सीधा असर
मान लीजिए दिल्ली से मेरठ का 70 किमी सफर, पहले सस्ता पड़ता था लेकिन अब 200 किमी रेट चुकाना होगा। स्लीपर में बेस किराया 149 रुपये से शुरू, जो दूरी बढ़ने पर बढ़ता जाएगा। जनरल कोच में थोड़ी ढील है लेकिन आरक्षित में स्ट्रिक्ट चेकिंग। कैंसिलेशन पर रिफंड भी तेज होगा, डिजिटल पेमेंट से 24 घंटे में पैसा वापस। ये सब मिलकर सफर को प्रीमियम बना रहे हैं।
यात्रियों को क्या फायदा-नुकसान?
फायदे में साफ-सुथरी ट्रेनें और ज्यादा स्पेस, क्योंकि ओवरलोडिंग रुकेगी। सुरक्षा बढ़ेगी, झगड़े कम होंगे। लेकिन नुकसान छोटे व्यापारियों और डेली कम्यूटर्स को, जिनका बजट टाइट है। रेलवे का मकसद प्रीमियम सर्विस देना है, लेकिन आम आदमी परेशान। पहले बुकिंग चेक करें, वरना प्लेटफॉर्म पर खड़े रह जाएंगे।
आगे क्या होगा बदलाव?
रेलवे लगातार अपडेट ला रहा है, जनवरी 2026 से ये नियम फुल स्विंग में। टिकट बुकिंग ऐप पर पहले चेक करें कि आपकी ट्रेन में ये लागू है या नहीं। छोटे सफर के लिए बस या लोकल ट्रेन बेहतर ऑप्शन। कुल मिलाकर सफर सुहाना लेकिन जेब ढीली करेगा। यात्री तैयार रहें, वरना सरप्राइज मिलेगा।
















