2026 में किरायेदारी के क्षेत्र में केंद्र सरकार ने क्रांतिकारी बदलाव कर दिए हैं। मकान मालिकों की मनमानी पर पूर्ण रोक लगाते हुए दो सख्त नियम लागू हो चुके हैं, जो किरायेदारों को अभूतपूर्व सुरक्षा प्रदान करते हैं। इन नियमों से किराया वृद्धि और डिपॉजिट की सीमाएं तय हो गई हैं, जिससे लाखों परिवारों को आर्थिक राहत मिलेगी।

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किराया वृद्धि पर सख्त नियंत्रण
अब मकान मालिक साल भर में केवल एक बार ही किराया बढ़ा सकेंगे, वो भी लिखित नोटिस के बाद। पहले तरह की अचानक 25-30 प्रतिशत की बढ़ोतरी अब इतिहास बन चुकी है। कम से कम 60 दिनों का पूर्व सूचना देना अनिवार्य होगा, ताकि किरायेदार अपनी योजना बना सकें। इससे बाजार में स्थिरता आएगी और झगड़े कम होंगे।
इसके अलावा, बढ़ोतरी की दर एग्रीमेंट में तय प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकेगी। यदि मालिक नियम तोड़ते हैं, तो किरायेदार स्थानीय ट्रिब्यूनल में शिकायत कर जुर्माना वसूल सकते हैं। ये बदलाव विशेष रूप से महानगरों जैसे दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु में रहने वालों के लिए वरदान साबित होंगे।
सिक्योरिटी डिपॉजिट की नई सीमा
दूसरा बड़ा नियम डिपॉजिट पर केंद्रित है। आवासीय मकानों के लिए अधिकतम दो महीने का किराया ही लिया जा सकेगा, जबकि पहले 6-10 महीने की मांग आम थी। व्यावसायिक संपत्तियों पर यह सीमा छह महीने रखी गई है। डिपॉजिट लौटाते समय कोई अनावश्यक कटौती नहीं हो सकेगी, जब तक फोटो या वीडियो प्रमाण न हो।
किरायेदार अब एग्रीमेंट समाप्ति के 15 दिनों के अंदर पूरी राशि वापस पा सकेंगे। उल्लंघन पर मालिकों को दोगुना ब्याज के साथ भुगतान करना पड़ेगा। ये प्रावधान किरायेदारों को आर्थिक बोझ से मुक्त करते हुए पारदर्शिता सुनिश्चित करते हैं।
लिखित एग्रीमेंट की अनिवार्यता
एग्रीमेंट में घर का पूरा विवरण, किराए की तारीख, मरम्मत की जिम्मेदारी और निकालने की शर्तें साफ लिखी होनी चाहिए। डिजिटल स्टांप लगाकर ऑनलाइन रजिस्टर करना अनिवार्य है।
बिना रजिस्ट्रेशन के किराया लेना-देना गैरकानूनी है, इस पर 5,000 रुपये तक जुर्माना लगेगा। इससे कैश पेमेंट बंद होकर डिजिटल भुगतान बढ़ेगा। ऊंचे किराए पर TDS कटना भी जरूरी होगा।
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बेदखली प्रक्रिया में सुधार
मकान मालिक बिना कोर्ट या ट्रिब्यूनल आदेश के किरायेदार को नहीं निकाल सकेंगे। बेदखली के लिए वैध कारण जैसे स्वयं उपयोग या मरम्मत जरूरी होंगे। प्रक्रिया 60 दिनों में पूरी होनी चाहिए। किरायेदार मकान मालिक के बिना अनुमति घर में प्रवेश का विरोध कर सकेंगे।
रखरखाव का खर्च भी तय हो गया है। मामूली मरम्मत किरायेदार की जिम्मेदारी, जबकि बड़े काम मालिक के। विवादों के लिए विशेष किरायेदारी कोर्ट स्थापित किए गए हैं।
मकान मालिकों के लिए सलाह
मालिकों को तुरंत मौजूदा एग्रीमेंट अपडेट कराने चाहिए। नए नियमों का पालन न करने पर संपत्ति जब्ती तक हो सकती है। ये बदलाव किरायेदारी बाजार को संतुलित बनाते हुए निवेश को प्रोत्साहित करेंगे।
किरायेदार क्या करें?
आज ही अपना एग्रीमेंट जांचें और आवश्यक बदलाव कराएं। सरकारी पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराएं। इन नियमों से न केवल सुरक्षा मिलेगी, बल्कि लंबे समय तक स्थिर जीवन संभव होगा।
















