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तांबे के बर्तन में पानी तो ठीक, पर खाना क्यों नहीं? भूलकर भी न करें ये गलती, बन सकता है धीमा जहर; जान लीजिए सही नियम

तांबे के लोटे का पानी तो अमृत है, लेकिन क्या आप इसमें खाना भी खाते हैं? सावधान! खट्टी चीजों और नमक के साथ तांबे की प्रतिक्रिया आपके भोजन को जहरीला बना सकती है। जानें वैज्ञानिक कारण और तांबे के इस्तेमाल के सही नियम।

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तांबे के बर्तन में पानी तो ठीक, पर खाना क्यों नहीं? भूलकर भी न करें ये गलती, बन सकता है धीमा जहर; जान लीजिए सही नियम।
तांबे के बर्तन

आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान दोनों ही तांबे (Copper) के बर्तन में पानी पीने के फायदों की सराहना करते हैं। लेकिन जब बात खाना पकाने या इसमें रखकर खाने की आती है, तो विशेषज्ञ सख्त मना करते हैं। आखिर ऐसा क्यों है कि जो तांबा पानी को अमृत बनाता है, वही खाने के साथ मिलकर ‘धीमा जहर’ बन सकता है?

तांबे के बर्तन में पानी तो ठीक, पर खाना क्यों नहीं?

तांबे के बर्तनों का इस्तेमाल सदियों से भारतीय रसोई में होता आया है। लेकिन पूर्वजों ने इसके उपयोग के लिए कुछ कड़े नियम बनाए थे, जिन्हें आज हम भूलते जा रहे हैं।

वैज्ञानिक कारण: क्यों खतरनाक है तांबे में खाना?

तांबा एक बहुत ही ‘प्रतिक्रियाशील धातु’ (Reactive Metal) है। जब हम तांबे के बर्तन में खाना पकाते हैं या रखते हैं, तो भोजन में मौजूद कार्बनिक एसिड (Organic Acids) तांबे के साथ रासायनिक प्रतिक्रिया (Chemical Reaction) करते हैं।

इस प्रक्रिया को ‘कॉपर टॉक्सिसिटी’ (Copper Toxicity) कहा जाता है। खाने के साथ तांबा घुलकर शरीर में चला जाता है, जो धीरे-धीरे स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुँचाता है।

‘धीमा जहर’ बनने का गणित

खासकर खट्टी चीजों, नमक और मसालों के साथ तांबे की प्रतिक्रिया बहुत तेज होती है। अगर आप निम्नलिखित चीजें तांबे के बर्तन में रखते हैं, तो वे जहरीली हो सकती हैं:

  • दूध और डेयरी उत्पाद: दही, पनीर या छाछ को तांबे में रखने से वे तुरंत खराब हो जाते हैं और फूड पॉइजनिंग का कारण बन सकते हैं।
  • खट्टी चीजें: नींबू का रस, सिरका, इमली, आम का अचार या टमाटर की चटनी तांबे के साथ मिलकर कॉपर सल्फेट बना सकती है, जो शरीर के लिए विषैला है।
  • नमक: नमक तांबे के ऑक्सीकरण को तेज कर देता है, जिससे धातु का स्वाद खाने में घुल जाता है।

तांबे में खाना खाने के नुकसान

यदि आप लंबे समय तक तांबे के बर्तन में पका हुआ भोजन करते हैं, तो आपको ये समस्याएं हो सकती हैं:

  • पाचन संबंधी विकार: उल्टी, दस्त, पेट में ऐंठन और मतली।
  • लिवर और किडनी को खतरा: शरीर में तांबे की अधिक मात्रा (Copper Overload) लिवर को डैमेज कर सकती है।
  • मस्तिष्क पर असर: अधिक कॉपर मानसिक थकान और भ्रम का कारण भी बन सकता है।

पानी पीना क्यों फायदेमंद है?

आपके मन में सवाल होगा कि फिर पानी पीना क्यों सही है? दरअसल, पानी एक न्यूट्रल लिक्विड है। जब हम रात भर तांबे के जग में पानी रखते हैं, तो तांबा पानी के हानिकारक बैक्टीरिया को खत्म कर देता है (Oligodynamic Effect)। पानी के साथ इसकी प्रतिक्रिया बहुत धीमी और सुरक्षित होती है, जो पाचन सुधारने और इम्युनिटी बढ़ाने में मदद करती है।

तांबे के बर्तन इस्तेमाल करने के सही नियम

  • केवल पानी के लिए: तांबे का उपयोग केवल पानी स्टोर करने के लिए ही करें।
  • कलाई (Tin Coating): अगर आप तांबे के बर्तन में खाना बनाना ही चाहते हैं, तो सुनिश्चित करें कि उसके अंदर ‘कलई’ (रांगे या टिन की परत) चढ़ी हुई हो। यह परत तांबे और खाने के बीच दीवार का काम करती है।
  • सफाई का ध्यान: तांबे के बर्तन को हमेशा पीतांबरी, नींबू या इमली से साफ करें ताकि उस पर जमी हरी परत (Copper Oxide) हट जाए।
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Author
info@stjohnscoeasptkmm.in

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