
बिजनौर, नवनीत शर्मा। पानीपत-गोरखपुर एक्सप्रेसवे (Panipat-Gorakhpur Expressway) के निर्माण की प्रक्रिया अब बिजनौर जिले में आधिकारिक रूप से शुरू हो गई है। इस महत्त्वपूर्ण हाई-स्पीड एक्सेस कंट्रोल कॉरिडोर (High-Speed Access Controlled Corridor) के निर्माण के लिए 131 गांवों की भूमि का अधिग्रहण (Land Acquisition) किया जाएगा। यह योजना प्रदेश सरकार द्वारा फेज-वन (Phase-1) के तहत शामली-पुवाया (Shamli-Puwaya) सेक्शन में लाई गई है।
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चार तहसीलों के गांवों में होगा भूमि अधिग्रहण
बिजनौर जिले की चार तहसीलें—बिजनौर, नजीबाबाद, नगीना और धामपुर—इस एक्सप्रेसवे का मार्ग तय करने में शामिल हैं। अधिकारियों ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि एक्सप्रेसवे के लिए जरूरी भूमि का अधिग्रहण शुरू करने से पहले सभी प्रक्रिया (Land Acquisition Procedure) पूरी की जाए।
विभागवार गांवों की सूची इस प्रकार है:
- बिजनौर: 6 गांव
- नजीबाबाद: 50 गांव
- नगीना: 38 गांव
- धामपुर: 37 गांव
कुल मिलाकर 131 गांवों की भूमि इस परियोजना के लिए अधिग्रहित की जाएगी।
एक्सप्रेसवे की रूपरेखा और बजट
बिजनौर जिले से गुजरते हुए यह एक्सप्रेसवे मुजफ्फरनगर (Muzaffarnagar) से प्रवेश करेगा और धामपुर तहसील से होते हुए मुरादाबाद (Moradabad) के लिए निकलेगा। जिले में एक्सप्रेसवे की अनुमानित लंबाई लगभग 55 किलोमीटर (km) होगी। इस हिस्से के निर्माण पर लगभग ₹2,729 करोड़ का बजट (Budget) खर्च होने का अनुमान है।
एक्सप्रेसवे के निर्माण का उद्देश्य न केवल सड़क मार्ग को तेज़ और सुरक्षित बनाना है, बल्कि औद्योगिक और व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा देना है। यह प्रोजेक्ट लॉजिस्टिक्स (Logistics) और आर्थिक विकास (Economic Growth) के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया और रोक
अधिग्रहण के लिए आवश्यक भूमि पर बैनामे (Land Records), भूमि उपयोग परिवर्तन (Land Use Change) आदि पर रोक (Restriction) लगा दी जाएगी। यह रोक तब तक रहेगी जब तक एक्सप्रेसवे के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती।
इस संदर्भ में संबंधित तहसीलों के एसडीएम (SDM) और सब-रजिस्ट्रार (Sub-Registrar) को भी पत्र जारी कर निर्देश दिए गए हैं कि वे संबंधित कार्रवाई में सहयोग करें। भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया पूरी होने तक किसी भी तरह के विवाद या बैनामे में बदलाव की अनुमति नहीं होगी।
अधिकारियों के बयान
डीएम बिजनौर, जसजीत कौर (Jasjeet Kaur, DM) ने कहा,
“पानीपत-गोरखपुर एक्सप्रेसवे के निर्माण के लिए आवश्यक भूमि अधिग्रहण से पहले संबंधित विभागों को सभी प्रक्रियाओं को पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। जिन गांवों की भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा, उनकी सूची पहले ही तैयार कर दी गई है।”
यह परियोजना क्षेत्र में ग्रामीण और शहरी विकास (Rural & Urban Development) के साथ-साथ रोजगार (Employment Opportunities) बढ़ाने में भी सहायक होगी।
एक्सप्रेसवे का महत्व
पानीपत-गोरखपुर एक्सप्रेसवे राज्य और राष्ट्रीय दोनों स्तर पर महत्वपूर्ण है। यह न केवल यातायात (Traffic) को सुचारू करेगा बल्कि समय की बचत (Time Saving) के साथ-साथ लॉजिस्टिक्स और व्यापारिक गतिविधियों में सुधार लाएगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह हाई-स्पीड एक्सेस कंट्रोल कॉरिडोर न केवल यातायात की समस्याओं को कम करेगा बल्कि क्षेत्र में रिन्यूएबल एनर्जी (Renewable Energy) और अन्य बुनियादी ढांचे (Infrastructure) के विकास में भी मदद करेगा।
















