आंगनवाड़ी बहनों के चेहरे पर अब मुस्कान आ गई है। केंद्र और राज्य सरकारों ने उनकी लंबी मांगों को सुनते हुए मानदेय में जबरदस्त बढ़ोतरी का ऐलान किया है। नई लिस्ट जारी होते ही पूरे देश में खुशी की लहर दौड़ पड़ी है, क्योंकि अब उनकी मेहनत का पूरा-पूरा फल मिलने वाला है।

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क्या है नई बढ़ोतरी?
यह बढ़ोतरी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और उनकी सहायिकाओं दोनों के लिए है। पहले जहां कार्यकर्ताओं को औसतन 4500 से 9000 रुपये तक मिलते थे, वहीं अब यह राशि 10,000 रुपये से ऊपर पहुंच गई है। सहायिकाओं का मानदेय भी 2250 रुपये से बढ़ाकर 5000-7500 रुपये कर दिया गया। कई राज्यों में यह 20-30 फीसदी की उछाल के साथ लागू हो रहा है, जो महिलाओं के सशक्तिकरण को नई गति देगा।
कौन-कौन से राज्य लाभान्वित?
उत्तर प्रदेश, झारखंड, अरुणाचल प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में यह बदलाव सबसे पहले लागू हो रहा है। उत्तर प्रदेश में कार्यकर्ताओं का मानदेय सीधे 9350 से 10,000 रुपये हो गया, जबकि सहायिकाओं को 6500 से 7500 रुपये का फायदा मिला। झारखंड में संगठनों की बैठक के बाद ग्रेच्युटी और प्रमोशन की मांग भी जोर पकड़ रही है। कुल मिलाकर 5 लाख से ज्यादा बहनें इस योजना से जुड़ेंगी, जिससे ग्रामीण इलाकों में विकास की नई कहानी बनेगी।
कैसे मिलेगा भुगतान?
नई लिस्ट के मुताबिक, यह बढ़ोतरी फरवरी 2026 से बैंक खातों में सीधे ट्रांसफर होगी। केंद्र सरकार का फिक्स्ड हिस्सा 4500 रुपये बना रहेगा, लेकिन राज्य सरकारें अतिरिक्त राशि जोड़ रही हैं। कुछ जगहों पर 13 नए अवकाश और दो अतिरिक्त जिम्मेदारियां भी जुड़ेंगी, जो पारदर्शिता बढ़ाएंगी। इससे न केवल आय बढ़ेगी, बल्कि काम का बोझ भी संतुलित होगा।
भविष्य की उम्मीदें
यह कदम आंगनवाड़ी बहनों को पूर्णकालिक राज्य कर्मचारी का दर्जा दिलाने की दिशा में बड़ा योगदान देगा। 2026 में प्रमोशन के नए मौके खुलेंगे, साथ ही पेंशन और मेडिकल सुविधाएं मजबूत होंगी। बच्चों, गर्भवती महिलाओं और कुपोषण से लड़ाई में उनकी भूमिका अब और मजबूत होगी। सरकार का यह फैसला नारी शक्ति को सलाम करने जैसा है, जो समाज के निचले पायदान को ऊपर उठाएगा।
















