
केंद्रीय बजट 2026 के पेश होने से पहले देश के मध्यम वर्ग और वाहन मालिकों की निगाहें वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पर टिकी हैं, सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस बार पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बड़ी कटौती देखने को मिलेगी? बाजार में यह चर्चा जोरों पर है कि सरकार ईंधन को वस्तु एवं सेवा कर (GST) के दायरे में लाने की तैयारी कर रही है, जिससे कीमतों में ₹25 से ₹30 तक की भारी गिरावट आ सकती है।
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GST में आने से कितना बदलेगा दाम?
वर्तमान में पेट्रोल-डीजल पर केंद्र सरकार Excise Duty और राज्य सरकारें VAT वसूलती हैं, जिससे कुल टैक्स की दर कई राज्यों में 50% से अधिक हो जाती है। SBI इकोनॉमिस्ट्स के विश्लेषण के अनुसार:
- यदि पेट्रोल को GST के अधिकतम 28% स्लैब में रखा जाता है, तो इसकी कीमत देशभर में ₹75-80 प्रति लीटर तक आ सकती है।
- इससे लॉजिस्टिक्स लागत कम होगी और महंगाई पर लगाम लगेगी।
क्या हैं चुनौतियां?
हालाँकि आम जनता को बड़ी राहत की उम्मीद है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि राह आसान नहीं है:
- पेट्रोल और डीजल राज्यों के राजस्व का मुख्य स्रोत हैं। GST में शामिल होने पर राज्यों को अपने वित्तीय अधिकारों का त्याग करना होगा, जिसके लिए GST काउंसिल में सर्वसम्मति की आवश्यकता है।
- केंद्र और राज्य दोनों को ही भारी टैक्स कलेक्शन का नुकसान हो सकता है, जिसकी भरपाई के लिए अन्य विकल्पों पर विचार करना होगा।
- रिपोर्टों के अनुसार, 2026 की पहली तिमाही में ब्रेंट क्रूड ऑयल के औसतन 55 डॉलर प्रति बैरल तक गिरने का अनुमान है, जो घरेलू स्तर पर कीमतें घटाने में मददगार साबित हो सकता है।
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बजट से उम्मीदें
वित्त मंत्रालय से जुड़े सूत्रों और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के हालिया संकेतों के अनुसार, सरकार आम आदमी को महंगाई से राहत देने के लिए एक्साइज ड्यूटी में कटौती या GST काउंसिल के माध्यम से ईंधन को नए ढांचे में लाने का रोडमैप पेश कर सकती है।
















