
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भरण-पोषण (Maintenance) के मामलों में एक सख्त रुख अपनाते हुए महत्वपूर्ण कानूनी व्यवस्था दी है, कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि हर परिस्थिति में पति अपनी पत्नी को गुजारा भत्ता देने के लिए कानूनी रूप से मजबूर नहीं है, अदालत ने उन आधारों को रेखांकित किया है, जहां पत्नी का भरण-पोषण का दावा खारिज किया जा सकता है।
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आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर पत्नी का अधिकार नहीं
दिसंबर 2025 में सुनाए गए एक फैसले में जस्टिस की पीठ ने स्पष्ट किया कि यदि पत्नी शिक्षित है और उसके पास आय का एक स्थिर स्रोत है, तो वह पति से भरण-पोषण की हकदार नहीं होगी, कोर्ट ने एक मामले का उदाहरण देते हुए कहा कि जहाँ पत्नी ₹36,000 प्रति माह कमा रही थी, वहां पति पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालना न्यायसंगत नहीं है, कोर्ट के अनुसार, भरण-पोषण का उद्देश्य केवल असहायता को रोकना है, न कि आर्थिक रूप से सक्षम पत्नी को अतिरिक्त लाभ पहुंचाना।
पति की शारीरिक अक्षमता और पत्नी का व्यवहार
जनवरी 2026 के एक हालिया और दुर्लभ फैसले में, कोर्ट ने मानवीय और न्यायसंगत पहलू पर जोर दिया, कोर्ट ने कहा कि यदि पति अपनी पत्नी या उसके परिवार के सदस्यों द्वारा किए गए किसी हमले या आपराधिक कृत्य के कारण शारीरिक रूप से अक्षम हो गया है और अब कमाने की स्थिति में नहीं है, तो ऐसी पत्नी पति से गुजारा भत्ता नहीं मांग सकती, कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि “उत्पीड़क को अपने ही कृत्य से लाभ उठाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।”
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बिना ठोस कारण के अलग रहना (CrPC 125(4))
हाईकोर्ट ने दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 125(4) का हवाला देते हुए दोहराया कि यदि कोई पत्नी बिना किसी वैध या पर्याप्त कारण के अपने पति का घर छोड़कर अलग रह रही है, तो वह कानूनन गुजारा भत्ता पाने की हकदार नहीं है, वैवाहिक दायित्वों का बिना कारण त्याग करने की स्थिति में पति को इस जिम्मेदारी से मुक्त रखा गया है।
तथ्यों को छिपाना पड़ेगा भारी
अदालत ने उन याचिकाकर्ताओं को भी कड़ी चेतावनी दी है जो अपनी वास्तविक आय या रोजगार की स्थिति के बारे में कोर्ट से झूठ बोलते हैं इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि जो पक्षकार ‘साफ हाथों’ (Clean hands) के साथ अदालत नहीं आते और महत्वपूर्ण तथ्य छिपाते हैं, उनके दावे को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया जाएगा।
‘क्षमता’ और ‘वास्तविक कमाई’ के बीच अंतर
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि केवल ‘उच्च शिक्षित होना’ या ‘कमाने की क्षमता रखना’ भरण-पोषण से इनकार करने का एकमात्र आधार नहीं हो सकता है, जब तक पत्नी वास्तव में कमा नहीं रही है, तब तक पति को उसकी गरिमापूर्ण जीवनशैली सुनिश्चित करनी पड़ सकती है, हालांकि, यदि पत्नी जानबूझकर अपनी आय छिपाती है या पति की लाचारी का कारण बनती है, तो यह कानून में एक विचारणीय विषय हो सकता है।
















