सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहा एक मैसेज दावा कर रहा है कि आधार को वोटर आईडी से लिंक न करने पर आपका वोटिंग अधिकार छिन जाएगा। लाखों लोग घबरा रहे हैं, लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। यह प्रक्रिया फर्जी वोटिंग रोकने के लिए चल रही है, पर कोई सख्त डेडलाइन या नाम कटने की बात अभी सच नहीं है। समय रहते सही जानकारी लें ताकि भ्रम न रहे।

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वायरल दावों का सच
व्हाट्सएप और फेसबुक पर घूम रहे संदेश कहते हैं कि 31 मार्च तक लिंकिंग न हुई तो वोटर लिस्ट से नाम गायब हो जाएगा। असल में चुनाव आयोग ने साल भर पहले इसकी शुरुआत की थी, जिसमें 64 करोड़ से ज्यादा लोगों ने हिस्सा लिया। डुप्लीकेट एंट्री वाले वोटरों को नया EPIC नंबर मिल रहा है, नाम काटा नहीं जा रहा। यह वैकल्पिक कदम है जो पारदर्शिता बढ़ाता है।
लिंकिंग का मकसद
देश में कई जगह एक ही व्यक्ति के नाम पर कई वोटर आईडी मिलीं, जिससे फर्जी वोटिंग की आशंका बनी। आधार की बायोमेट्रिक तकनीक से एक व्यक्ति-एक वोट सुनिश्चित होता है। इससे चुनाव निष्पक्ष बनते हैं और वोटर लिस्ट सटीक रहती है। लाखों डुप्लीकेट हट चुके हैं, लेकिन असली वोटरों पर कोई असर नहीं पड़ा।
गोपनीयता पर सवाल
लोग चिंतित हैं कि आधार जैसी संवेदनशील जानकारी लिंक होने से डेटा चोरी का खतरा बढ़ेगा। विपक्ष ने भी निजता भंग का मुद्दा उठाया। आयोग का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के तहत ही यह हो रहा है और डेटा सुरक्षित रखा जाएगा। फिर भी, सावधानी बरतें और सिर्फ आधिकारिक ऐप इस्तेमाल करें।
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आसान लिंकिंग स्टेप्स
घर बैठे वोटर हेल्पलाइन ऐप डाउनलोड करें या nvsp.in पर जाएं। अपना EPIC नंबर, आधार डालें, OTP वेरिफाई करें। प्रक्रिया मुफ्त है और 3-4 दिन में अपडेट हो जाती है। मोबाइल पहले से लिंक होना चाहिए। समस्या हो तो हेल्पलाइन 1950 पर कॉल करें।
आगे क्या होगा?
चुनाव आयोग लगातार अपडेट दे रहा है। नए वोटरों के लिए आधार अनिवार्य हो सकता है, लेकिन पुराने वोटर सुरक्षित हैं। वायरल मैसेज शेयर न करें, बल्कि elections.tnvsp.gov.in चेक करें। लोकतंत्र की ताकत वोट है, इसे बचाने के लिए सही कदम उठाएं। जागरूक रहें, अफवाहों से दूर!
















