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सस्ते सोलर पैनल की चमक में कहीं लुट न जाएं! असली और नकली पैनल पहचानने के 5 धांसू तरीके; खरीदने से पहले ये टेस्ट जरूर करें।

सोलर सब्सिडी के चक्कर में सस्ते पैनल खरीदकर लाखों गँवा चुके हैं लोग! असली-नकली की धाँधली से बचें। खरीदने से पहले ये 5 आसान टेस्ट करें – वारंटी चेक से लेकर लाइट टेस्ट तक। पैसे बचाएँ, बिजली कमाएँ!

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सोलर एनर्जी आज हर घर की जरूरत बन चुकी है, लेकिन बाजार में सस्ते दामों का लालच देकर नकली पैनल बेचने का धंधा तेजी से फैल रहा है। ये नकली पैनल दिखने में चमकदार लगते हैं, मगर कुछ ही महीनों में बिजली बनाना बंद कर देते हैं, जिससे हजारों रुपये का नुकसान हो जाता है। अच्छी बात ये है कि कुछ आसान घरेलू टेस्ट से आप खुद ही असली माल की तस्दीक कर सकते हैं। आइए जानते हैं इन 5 धांसू तरीकों को, जो खरीदने से पहले जरूर आजमाएं।

सस्ते सोलर पैनल की चमक में कहीं लुट न जाएं! असली और नकली पैनल पहचानने के 5 धांसू तरीके; खरीदने से पहले ये टेस्ट जरूर करें।

जंक्शन बॉक्स की मजबूती परखें

सोलर पैनल के पिछले हिस्से पर लगा जंक्शन बॉक्स सबसे पहला संकेत देता है। असली पैनल में ये बॉक्स मजबूत प्लास्टिक का बना होता है, जिसमें साफ कनेक्शन पॉइंट्स नजर आते हैं। नकली वाले में सिर्फ पतली तारों वाली सस्ती पट्टियां लगी मिलेंगी, जो गर्मी सहन नहीं कर पातीं। बॉक्स को हल्का दबाकर देखें – अगर ढीलापन लगे तो पीछे हट जाएं। ये छोटी सी जांच सालों की परेशानी बचा सकती है।

कवर टेस्ट से बेनकाब करें नकलीपन

ये सबसे सटीक घरेलू तरीका है। पैनल को बैटरी या इन्वर्टर से जोड़कर एम्पियर नोट करें। फिर पैनल की पूरी सतह पर काला कपड़ा या मोटा कंबल अच्छे से ढक दें। असली पैनल में लाइट कटते ही आउटपुट खत्म हो जाएगा या बहुत कम रह जाएगा। लेकिन नकली में एम्पियर अभी भी दिखेगा, क्योंकि ये झूठे सेल्स पर चलते हैं। धूप वाले दिन ये टेस्ट 100% काम करता है।

स्टिकर और स्पेसिफिकेशन की दोहरी जांच

असली पैनल पर सामने और पीछे दोनों तरफ स्टिकर लगे होते हैं, जिनमें वाटेज, बारकोड, कंपनी नाम और सेल काउंट साफ लिखा मिलता है। टेम्पर्ड ग्लास के नीचे भी नाम प्रिंट होता है। नकली में सिर्फ ऊपर चिपकाया स्टीकर होता है, जो नमी से उखड़ जाता है। 144 सेल्स या 16 बसबार जैसे नंबर काउंट करें – मैच न करें तो फेक है। हमेशा दोनों साइड क्रॉस चेक करें।

बिल्ड क्वालिटी और वजन का राज

अच्छे पैनल की बनावट शानदार होती है – मोटा एल्यूमिनियम फ्रेम, साफ किनारे, चमकदार ग्लास और भारी वजन। नकली में फ्रेम पतला, सेल्स ढीले और सतह पर गड़बड़ निशान दिखते हैं। हाथ से थोड़ा दबाएं, झुकाव आए तो खारिज। वजन में भी फर्क होता है; असली 20-25 किलो का 500 वाट पैनल नकली से दोगुना भारी लगता है। फिनिशिंग से ही 50% धोखा पकड़ में आ जाता है।

वोल्टेज-वारंटी की आखिरी लकीर

मल्टीमीटर से ओपन सर्किट वोल्टेज मापें – कंपनी के स्पेसिफिकेशन से कम हो तो संदेहास्पद। सीरियल नंबर को ब्रांड की वेबसाइट पर डालकर वेरीफाई करें। लिखित वारंटी और सर्विस सेंटर की डिटेल मांगें। बिना बैकअप वाले सस्ते पैनल रखरखाव में महंगे साबित होते हैं। ये स्टेप खरीदारी को पूरी तरह सुरक्षित बनाता है।

इन टेस्ट्स से आप सोलर सिस्टम लगवाते वक्त स्मार्ट चॉइस कर पाएंगे। बिजली बिल बचाने का सपना पूरा करने के लिए क्वालिटी पर कभी समझौता न करें। सही पैनल चुनें, लंबे समय तक फायदा उठाएं!

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info@stjohnscoeasptkmm.in

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