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पुश्तैनी जमीन पर बड़ा बदलाव! अब बेटा हो या बेटी, सबको मिलेगा बराबर का हक; सुप्रीम कोर्ट के आदेश ने बदली तस्वीर

सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले ने पुश्तैनी जमीन के नियम उलट दिए। अब बेटी को भी बराबर हक, बेटे का वर्चस्व खत्म! लाखों परिवारों की तस्वीर बदलेगी, जानें कैसे लागू होगा ये बदलाव।

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पुश्तैनी संपत्ति को लेकर सालों से चले आ रहे विवादों पर अब पूर्ण विराम लग गया है। देश की सबसे बड़ी अदालत ने एक ऐसा फैसला सुनाया है, जो पुरानी परंपराओं को पीछे छोड़ते हुए लैंगिक समानता को मजबूत आधार देता है। अब चाहे बेटा हो या बेटी, दोनों को पैतृक जमीन में एक समान हिस्सा मिलेगा। यह बदलाव न सिर्फ परिवारों के बीच शांति लाएगा, बल्कि महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त भी बनाएगा। ग्रामीण भारत में जहां जमीन ही मुख्य संपत्ति होती है, वहां यह फैसला लाखों जिंदगियों को नई दिशा देगा।

पुश्तैनी जमीन पर बड़ा बदलाव! अब बेटा हो या बेटी, सबको मिलेगा बराबर का हक; सुप्रीम कोर्ट के आदेश ने बदली तस्वीर

फैसले की पृष्ठभूमि

कई पीढ़ियों से चली आ रही प्रथा के तहत पुश्तैनी जमीन का बड़ा हिस्सा बेटों को ही मिलता रहा है। बेटियों को शादी के बाद परिवार से अलग मान लिया जाता था, जिससे उनका हक छिन जाता था। लेकिन अब अदालत ने साफ लफ्जों में कहा है कि जन्म से ही बेटियां भी संपत्ति की सह-मालिक होती हैं। यह नियम हिंदू परिवारों पर पूरी तरह लागू होगा और पुराने कानूनों को नया रूप देगा। इससे पहले भी कई छोटे-मोटे फैसले आए थे, लेकिन यह सबसे व्यापक और बाध्यकारी है। परिवारों को अब पुराने दस्तावेज दोबारा जांचने होंगे।

महिलाओं पर क्या असर पड़ेगा?

ग्रामीण इलाकों में बेटियां अक्सर आर्थिक रूप से निर्भर रहती हैं। अब वे जमीन के बंटवारे, बिक्री या खेती के फैसलों में बराबर की हिस्सेदार होंगी। इससे न सिर्फ उनकी आवाज मजबूत होगी, बल्कि परिवारिक विवाद भी कम होंगे। शहरी क्षेत्रों में भी फ्लैट या प्लॉट जैसी संपत्तियों पर बेटियों का हक सुनिश्चित होगा। किसान परिवारों के लिए यह बड़ा सहारा बनेगा, क्योंकि जमीन बेचने या गिरवी रखने के समय सभी की सहमति जरूरी होगी। लंबे समय में इससे महिलाओं की शिक्षा और स्वावलंबन को बढ़ावा मिलेगा।

पुरुषों के अधिकारों पर असर

यह मतलब बिल्कुल नहीं कि बेटों का हक कम हो जाएगा। दोनों को बराबर हिस्सा मिलेगा, जो पारिवारिक एकता को मजबूत करेगा। पहले बेटे अकेले फैसले लेते थे, जिससे बहनें उपेक्षित महसूस करती थीं। अब संयुक्त फैसले लेंगे, जो संपत्ति का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करेंगे। हालांकि, कुछ परिवारों में शुरुआती विरोध हो सकता है, लेकिन कानून सबको बराबर मानता है। पुरानी वसीयतों को चुनौती दी जा सकेगी, जिससे न्याय मिलेगा।

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आगे क्या कदम उठाएं?

अगर आपके परिवार में पुश्तैनी जमीन है, तो तुरंत वकील से संपर्क करें। पुराने रिकॉर्ड जैसे खाता-खतौनी, जमानामारा और म्यूटेशन चेक करवाएं। बंटवारे के लिए कोर्ट या तहसील में आवेदन दें। नई रजिस्ट्री कराते समय सभी वारिसों के नाम शामिल करें। राज्य सरकारें जल्द ही दिशानिर्देश जारी करेंगी, जिनका पालन अनिवार्य होगा। विवाद होने पर स्थानीय कोर्ट से स्टे लें। समय रहते कागजी कार्रवाई पूरी करें, वरना देरी महंगी पड़ सकती है।

समाज पर लंबे प्रभाव

यह फैसला सिर्फ जमीन तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे समाज की सोच बदलेगा। लैंगिक असमानता के खिलाफ एक मजबूत संदेश है। आने वाले वर्षों में संपत्ति विवादों में कमी आएगी और आर्थिक विकास को बल मिलेगा। किसान परिवार मजबूत होंगे, क्योंकि महिलाएं भी खेती-बाड़ी में निवेश करेंगी। कुल मिलाकर, यह लोकतंत्र की जीत है जहां कानून सभी के लिए एक समान है। परिवार एकजुट रहें, तभी संपत्ति का सही महत्व समझ आएगा।

Author
info@stjohnscoeasptkmm.in

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