केंद्र सरकार ने 2026 में किसानों को बड़ी सौगात दी है। डीएपी और यूरिया जैसी प्रमुख खादों पर सब्सिडी में जबरदस्त इजाफा किया गया है, जिससे रबी फसलों की बुआई आसान हो जाएगी। खेतों में बढ़ती लागत को देखते हुए यह कदम समय पर राहत लेकर आया है, ताकि अन्नदाता बिना चिंता के खेती कर सकें।

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सब्सिडी का जादुई असर
रबी सीजन के लिए पोषक तत्व आधारित सब्सिडी योजना को मजबूत बनाया गया। डीएपी पर प्रति टन हजारों रुपये की अतिरिक्त छूट मिल रही है, जो पहले से कहीं ज्यादा है। यूरिया का स्टॉक भी भरपूर है, जिससे कालाबाजारी का कोई जोखिम नहीं। नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश जैसे जरूरी तत्व अब सस्ते दामों पर घर-घर पहुंच रहे हैं। इससे फसलें लहलहाएंगी और उपज में इजाफा होगा।
आज के ताजा भाव लिस्ट
- डीएपी (18-46-0): करीब 30,000 रुपये प्रति मीट्रिक टन पर भारी सब्सिडी, बाजार मूल्य से काफी कम।
- यूरिया: सरकारी दरों पर असीमित उपलब्धता, प्रति बैग महज कुछ सौ रुपये।
- एनपीके मिश्रण: 17,000 से 21,000 रुपये टन, सल्फर युक्त ग्रेड्स पर एक्स्ट्रा बेनिफिट।
- अन्य जैसे एसएसपी और एमओपी: 7,000 से 20,000 रुपये रेंज में, सूक्ष्म पोषक बोरॉन-जिंक पर बोनस।
ये भाव 1 अक्टूबर 2025 से 31 मार्च 2026 तक लागू हैं। किसान भाई इन दरों का फायदा उठाकर अपनी लागत घटा सकते हैं।
किसानों को क्या फायदा?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे माल की कीमतें आसमान छू रही हैं, लेकिन सरकार ने सब्सिडी बढ़ाकर किसानों को बचाया। गेहूं, सरसों, दालों जैसी रबी फसलों में बेहतर पैदावार की उम्मीद। उत्तर भारत के राज्यों में पहले ही स्टॉक वितरण तेज हो गया है। कुल मिलाकर 38,000 करोड़ से ज्यादा का पैकेज खेती को बूस्ट देगा। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत बनेगी और खाद्यान्न उत्पादन रिकॉर्ड तोड़ेगा।
खरीदारी के आसान टिप्स
नजदीकी को-ऑपरेटिव सोसाइटी या अधिकृत डीलर के पास आधार कार्ड लेकर पहुंचें। स्टॉक की जानकारी राज्य उर्वरक विभाग के पोर्टल से चेक करें। ज्यादा मात्रा में बुकिंग के लिए ऐप का इस्तेमाल करें। ओवरप्राइसिंग से बचने के लिए रसीद जरूर लें। समय पर खरीदें, वरना रबी सीजन में देरी न हो।
भविष्य की उम्मीदें
यह सब्सिडी न सिर्फ वर्तमान फसल को सुरक्षित करेगी, बल्कि लंबे समय तक खेती को आत्मनिर्भर बनाएगी। किसान सही मात्रा में खाद डालकर मिट्टी की उर्वरता बनाए रखें। सरकार का यह प्रयास ‘दोगुनी आय’ के सपने को साकार करेगा। जल्द ही नई फसलें बाजार में लहरें छानेंगी।
















