पीएम किसान सम्मान निधि योजना छोटे किसानों के लिए एक बड़ा सहारा बनी हुई है, जो हर साल 6 हजार रुपये तीन बराबर किस्तों में देती है। लेकिन अब लाखों किसानों के सामने खतरे का संकेत दिख रहा है, क्योंकि दो सामान्य चूकें उनके नाम को लाभार्थी सूची से बाहर कर सकती हैं। यह लेख बताएगा कि ये गलतियां क्या हैं और तुरंत कैसे सुधारें, ताकि आगामी 2 हजार रुपये की किस्त बिना रुकावट मिले। समय रहते कदम उठाएं, वरना फरवरी 2026 की किस्त पर असर पड़ सकता है। सरकारी पोर्टल पर जाकर आसानी से सब ठीक हो सकता है। चलिए जानते हैं पूरी डिटेल।

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किस्त रुकने का कारण समझें
कई बार छोटी-छोटी लापरवाही से सालाना सहायता रुक जाती है। योजना में अब डिजिटल सत्यापन को बहुत महत्व दिया जा रहा है, जिससे फर्जी लाभार्थियों को रोका जा सके। अगर बुनियादी अपडेट न हों, तो सिस्टम नाम हटा देता है। लाखों किसान इसी वजह से परेशान हो रहे हैं।
पहली बड़ी गलती: ई-केवाईसी अधूरा रहना
ई-केवाईसी न करने से सबसे ज्यादा दिक्कत होती है। यह आधार आधारित सत्यापन है, जो हर लाभार्थी के लिए अनिवार्य हो गया है। बिना इसके खाता निष्क्रिय हो जाता है। मोबाइल नंबर और आधार लिंक न होने पर भी यही समस्या आती है।
दूसरी गलती: फार्मर आईडी न बनाना
अब सिर्फ ई-केवाईसी काफी नहीं, यूनिक फार्मर आईडी भी जरूरी है। यह एक विशेष पहचान संख्या है जो सरकारी डेटाबेस में रजिस्ट्रेशन को मजबूत बनाती है। बिना इसके अगली किस्त सीधे रुक सकती है। जमीन के रिकॉर्ड में नाम न मिलने पर भी नाम कट जाता है।
बैंक विवरण में छिपी परेशानी
बैंक खाता आधार से लिंक न होना या आईएफएससी कोड गलत होना आम समस्या है। अगर खाता बंद हो गया हो या नाम में मामूली अंतर हो, तो पैसे ट्रांसफर फेल हो जाते हैं। तहसील स्तर पर जमीन म्यूटेशन पेंडिंग रहने से भी दिक्कत बढ़ती है।
सुधार के सरल उपाय अपनाएं
सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट पर लॉगिन करें। ई-केवाईसी सेक्शन में ओटीपी या बायोमेट्रिक से अपडेट करें। फार्मर आईडी जेनरेट करने के लिए आधार और मोबाइल भरें। बैंक डिटेल्स चेक करें और नेशनल पोर्टल पर आधार सीडिंग कराएं। स्थानीय पटवारी से जमीन रिकॉर्ड ठीक करवाएं।
समय पर स्टेटस जांचें
हर हफ्ते लाभार्थी सूची चेक करें। रजिस्ट्रेशन नंबर डालकर पेमेंट स्टेटस देखें। अगर कोई अलर्ट आए, तो तुरंत सुधार करें। यह प्रक्रिया 10-15 मिनट में पूरी हो जाती है।
योजना के फायदे और सावधानियां
यह योजना बीज, खाद और घरेलू खर्चों में मदद करती है। पारदर्शी डीबीटी सिस्टम से पैसे सीधे खाते में आते हैं। लेकिन अपात्र श्रेणियों जैसे बड़े जमींदारों को इससे वंचित रखा जाता है। हमेशा सरकारी साइट्स पर भरोसा करें। फरवरी 2026 की 22वीं किस्त से पहले ये कदम उठाएं। इससे न सिर्फ पैसे बचेंगे, बल्कि भविष्य की किस्तें भी सुरक्षित रहेंगी। आज ही एक्शन लें और चिंता मुक्त रहें।
















