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क्या बेटियों को पिता की संपत्ति में नहीं मिलेगा हक? सुप्रीम कोर्ट का आया ऐतिहासिक फैसला; इन 2 स्थितियों में बदल जाता है कानून।

सोशल मीडिया पर वायरल खबर ने उथल पुथल मचा दी! लाखों बेटियां परेशान। लेकिन असली सच जानकर हैरान रह जाएंगे यह सिर्फ एक केस था, आपका हक सुरक्षित! अभी पढ़ें पूरा फायदा।

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सोशल मीडिया पर तेजी से फैली एक खबर ने लाखों परिवारों को हिला दिया। दावा किया गया कि उच्चतम न्यायालय ने फैसला दिया है बेटियां अब अपने पिता की संपत्ति पर कोई अधिकार नहीं रख सकतीं। इससे बेटियां चिंतित हो गईं और परिवारों में बहस छिड़ गई। लेकिन यह खबर गलत तरीके से पेश की गई है। वास्तव में उच्चतम न्यायालय का फैसला हर बेटी के लिए नहीं बल्कि एक विशेष परिस्थिति पर आधारित था। आज भी बेटियों के संपत्ति अधिकार पूरी तरह सुरक्षित हैं। आइए जानते हैं पूरा सच।

क्या बेटियों को पिता की संपत्ति में नहीं मिलेगा हक? सुप्रीम कोर्ट का आया ऐतिहासिक फैसला; इन 2 स्थितियों में बदल जाता है कानून।

उच्चतम न्यायालय का फैसला किस मामले से जुड़ा था

उच्चतम न्यायालय ने हाल ही में एक अनोखे मामले पर विचार किया। इसमें एक बेटी ने स्वयं न्यायालय में कहा कि वह अपने पिता से सभी प्रकार के संबंध समाप्त कर चुकी है। न कानूनी नाता न भावनात्मक जुड़ाव और न ही पारिवारिक संपर्क बाकी था। पिता ने पहले ही उसकी शिक्षा भरण पोषण और दैनिक जरूरतों की पूरी जिम्मेदारी निभा दी थी।

ऐसी स्थिति में न्यायालय ने फैसला दिया कि जब बेटी ने खुद ही संबंध तोड़ दिए और संपत्ति की देखभाल या अधिकार में कभी रुचि नहीं ली तो अब दावा करना उचित नहीं। यह फैसला सामान्य नियम नहीं बनता बल्कि इस मामले की विशेष परिस्थितियों तक सीमित है। इससे साफ है कि सोशल मीडिया की खबरें अतिरंजित हैं।

क्या यह फैसला हर बेटी पर लागू होगा

नहीं बिल्कुल नहीं। यह फैसला उन बेटियों पर लागू नहीं होता जो अपने पिता से जुड़ी रहती हैं। चाहे बेटी विवाहित हो अविवाहित तलाकशुदा या विधवा यदि वह पारिवारिक संबंध बनाए रखती है तो पैतृक संपत्ति में भाइयों के समान अधिकार मिलते हैं। हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के दो हजार पांच के संशोधन ने इसे कानूनी रूप से मजबूत किया।

इस संशोधन से बेटी को जन्म से ही पैतृक संपत्ति में हिस्सेदार बनाया गया। पहले बेटियों को सीमित अधिकार मिलते थे लेकिन अब कोई भेदभाव नहीं। उच्चतम न्यायालय सामान्य मामलों में इस कानून को नहीं बदल सकता जब तक विशेष कारण न हों। इसलिए बेटियां निश्चिंत रहें।

यह भी पढ़ें- सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: पैतृक संपत्ति बेचना अब होगा मुश्किल, जानें नया कानून

दो हजार पांच का ऐतिहासिक संशोधन और बेटियों के अधिकार

दो हजार पांच में हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम में बड़ा बदलाव आया। इससे बेटियों को पैतृक संपत्ति में बेटों के बराबर अधिकार मिले। बेटी का हक जन्म लेते ही शुरू हो जाता है। वह संपत्ति की सह मालिक और उत्तराधिकारी बन जाती है।

पहले स्थिति अलग थी बेटियों को विवाह तक या छोटा हिस्सा ही मिलता। लेकिन संशोधन ने समानता सुनिश्चित की। आज देशभर में लाखों बेटियां इसी कानून से लाभ ले रही हैं। यह महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम था।

स्व अर्जित संपत्ति पर अलग नियम क्या हैं

पिता की वह संपत्ति जो उन्होंने अपनी कमाई से बनाई जैसे नौकरी व्यापार या निवेश से प्राप्त तो नियम थोड़े भिन्न हैं। यदि पिता ने वसीयत या दान पत्र बनाया है तो उसका पालन होगा। बेटी को उस पर दावा नहीं मिलेगा।

लेकिन यदि कोई वसीयत नहीं है तो बिना वसीयत उत्तराधिकार नियम लागू होते हैं। इसमें बेटी को भाइयों के बराबर हिस्सा निश्चित रूप से मिलेगा। परिवारों को सलाह है कि संपत्ति संबंधी दस्तावेज साफ रखें और आपसी समझबूझ बनाए रखें।

अंत में सोशल मीडिया की अफवाहें परिवार तोड़ने वाली हो सकती हैं। सही कानूनी जानकारी से बचाव करें। यदि कोई संदेह हो तो वकील से परामर्श लें। बेटियों के अधिकार मजबूत हैं और बने रहेंगे।

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info@stjohnscoeasptkmm.in

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